टाइम कार्ड कैलकुलेटर
वेतन दशमलव घंटों में बनता है, और हाथ से भरा टाइम कार्ड यहीं गड़बड़ करता है। आठ घंटे तीस मिनट 8.5 होते हैं, 8.30 नहीं। पंद्रह मिनट 0.25 हैं, बीस मिनट 0.33 और चालीस मिनट 0.67। साढ़े आठ घंटे के लिए 8.5 की जगह 8.30 लिखने पर रोज़ बारह मिनट का पैसा कम बनता है — हफ़्ते में करीब एक घंटा। इतना कम कि नज़र न आए, और इतना ज़्यादा कि साल भर में मायने रखे।
काम के घंटे यानी जाने का समय घटाओ आने का समय, और उसमें से बिना वेतन का विराम घटा दो। नौ बजे से छह बजे तक आधे घंटे के विराम के साथ 8.5 घंटे बनते हैं — वेतन के लिए यही दशमलव आँकड़ा चाहिए, 8:30 नहीं। हफ़्ते वाले हिसाब में 52 घंटे, ₹300 प्रति घंटा और 48 के बाद दोगुनी दर पर कुल ₹16,800 बनते हैं।
टाइम कार्ड कैसे जोड़ें
वेतन दशमलव घंटों में बनता है, और हाथ से भरा टाइम कार्ड यहीं गड़बड़ करता है। आठ घंटे तीस मिनट 8.5 होते हैं, कभी 8.30 नहीं। पंद्रह मिनट 0.25, बीस मिनट 0.33, चालीस मिनट 0.67। साढ़े आठ घंटे के लिए 8.30 लिख देने पर रोज़ बारह मिनट का पैसा छूट जाता है, यानी हफ़्ते में करीब एक घंटा — इतना कम कि किसी की नज़र न पड़े और इतना ज़्यादा कि साल भर में मायने रखे।
कारखाना अधिनियम क्या कहता है
भारत में ढाँचा अमेरिका से अलग है, और गुणक तय करने से पहले यह साफ़ होना चाहिए। कारखाना अधिनियम 1948 के अनुसार काम नौ घंटे प्रतिदिन और अड़तालीस घंटे प्रति सप्ताह से ज़्यादा नहीं हो सकता (धारा 51 और 54)। इनमें से किसी भी सीमा से ऊपर का काम ओवरटाइम है और उस पर सामान्य दर से दोगुना वेतन देय है (धारा 59) — डेढ़ गुना नहीं, जो अमेरिकी नियम है और जिसे अक्सर यहाँ भी मान लिया जाता है। लगातार पाँच घंटे से ज़्यादा काम नहीं कराया जा सकता, बीच में कम से कम आधे घंटे का विराम ज़रूरी है (धारा 55), और विराम मिलाकर पूरा दिन साढ़े दस घंटे से लंबा नहीं हो सकता (धारा 56)। ओवरटाइम पर भी सीमा है: किसी तिमाही में पचास घंटे से ज़्यादा नहीं (धारा 64 और 65 के तहत राज्य के नियमों के अनुसार)।
दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों पर कारखाना अधिनियम नहीं, बल्कि अपने-अपने राज्य का दुकान एवं स्थापना अधिनियम लागू होता है, और उसकी सीमाएँ राज्य दर राज्य बदलती हैं — कहीं दैनिक सीमा नौ घंटे है, कहीं आठ। इसीलिए यहाँ सीमा और गुणक दोनों बदले जा सकते हैं; तय मानकर नहीं चलाए गए।
असली दर क्या बताती है
हफ़्ते वाले हिसाब में "सभी घंटों पर असली दर" की पंक्ति कोई भी अतिरिक्त शिफ़्ट लेने से पहले पढ़ने लायक है। अड़तालीस घंटे के ऊपर चार घंटे ओवरटाइम औसत दर को उतना नहीं बढ़ाते जितना दोगुने की बात से लगता है, क्योंकि दोगुनी दर सिर्फ़ उन्हीं अतिरिक्त घंटों पर लगती है, पूरे हफ़्ते पर नहीं। इसमें कर जोड़ लें, ख़ासकर जब अतिरिक्त आय किसी ऊपरी स्लैब में पहुँचा दे, तो एक अतिरिक्त घंटे का असली मोल और कम रह जाता है।
लोग इसे किस काम में लेते हैं
- वेतन पर्ची को असल में किए गए घंटों से मिलाना
- हफ़्ते का हाज़िरी पत्रक भरना
- भारी हफ़्ते को सामान्य और ओवरटाइम घंटों में बाँटना
- यह तय करना कि अतिरिक्त शिफ़्ट लेना फ़ायदे का है या नहीं
- घंटे-मिनट को वेतन के लिए दशमलव में बदलना
सवाल
मिनटों को 60 से भाग दीजिए। तीस मिनट 0.5, बीस मिनट 0.33 और पैंतालीस मिनट 0.75 होते हैं।
कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 59 के अनुसार सामान्य दर से दोगुनी, जब काम नौ घंटे प्रतिदिन या अड़तालीस घंटे प्रति सप्ताह से ऊपर जाए।
नहीं। उन पर राज्य का दुकान एवं स्थापना अधिनियम लागू होता है और उसकी सीमाएँ राज्य दर राज्य अलग हैं। इसीलिए यहाँ सीमा और गुणक दोनों बदले जा सकते हैं।
कारखानों में आमतौर पर एक तिमाही में पचास घंटे तक, और यह सीमा राज्य के नियमों से तय होती है।
हाँ। जाने का समय आने के समय से पहले हो तो इसे आधी रात पार करने वाली शिफ़्ट माना जाता है।
तभी जब वह बिना वेतन का हो। अधिनियम पाँच घंटे से ज़्यादा लगातार काम पर कम से कम आधे घंटे का विराम अनिवार्य करता है; वह वेतन सहित है या नहीं, यह आपकी शर्तों पर निर्भर है।
विराम मिलाकर साढ़े दस घंटे, यानी नौ बजे आने पर साढ़े सात बजे तक। यह सीमा काम के घंटों से अलग है।
अलग दर से नहीं, पर अतिरिक्त आय कुल आय को ऊपरी स्लैब में धकेल सकती है, जो वेतन में उतना ही महसूस होता है।
कुल कमाई को सभी घंटों से भाग देकर मिली दर, ओवरटाइम समेत। यह बताती है कि हफ़्ते ने प्रति घंटा सचमुच कितना दिया।
उनके घंटे जोड़कर हफ़्ते वाला विकल्प इस्तेमाल करें। शिफ़्ट वाला विकल्प एक आने-जाने के जोड़े पर चलता है, और एक जैसे दिनों के लिए उसमें दिनों की संख्या है।
क्योंकि वेतन दशमलव घंटों में गिना जाता है, जहाँ दशमलव के बाद का हिस्सा साठ मिनट का अंश है। आठ घंटे तीस मिनट 8.5 हैं; 8.30 का मतलब आठ घंटे अठारह मिनट है।