वित्त वेतन

टाइम कार्ड कैलकुलेटर

पिछली समीक्षा 16 अक्टू॰ 2026 ·तरीक़ा: काम के घंटे में से बिना वेतन का विराम घटाकर, तय सीमा से ऊपर के घंटे दिए गए गुणक पर।
आने का समय
जाने का समय
बिना वेतन का विराम
मिनट
ओवरटाइम इतने घंटे बाद
घं
प्रति घंटा दर
ओवरटाइम गुणक
हफ़्ते में ऐसे दिन
काम के घंटे 8 घं 30 मि
09:00 से 18:00 तक, 30 मिनट घटाकर
दशमलव में 8.5 घं
मिनट में 510
सामान्य घंटे 8.5
ओवरटाइम घंटे 0
शिफ़्ट की कमाई 2,550
हफ़्ते के घंटे 51
हफ़्ते की कमाई 15,300
दशमलव घंटे · बढ़ी दर सिर्फ़ सीमा के ऊपर

वेतन दशमलव घंटों में बनता है, और हाथ से भरा टाइम कार्ड यहीं गड़बड़ करता है। आठ घंटे तीस मिनट 8.5 होते हैं, 8.30 नहीं। पंद्रह मिनट 0.25 हैं, बीस मिनट 0.33 और चालीस मिनट 0.67। साढ़े आठ घंटे के लिए 8.5 की जगह 8.30 लिखने पर रोज़ बारह मिनट का पैसा कम बनता है — हफ़्ते में करीब एक घंटा। इतना कम कि नज़र न आए, और इतना ज़्यादा कि साल भर में मायने रखे।

काम के घंटे यानी जाने का समय घटाओ आने का समय, और उसमें से बिना वेतन का विराम घटा दो। नौ बजे से छह बजे तक आधे घंटे के विराम के साथ 8.5 घंटे बनते हैं — वेतन के लिए यही दशमलव आँकड़ा चाहिए, 8:30 नहीं। हफ़्ते वाले हिसाब में 52 घंटे, ₹300 प्रति घंटा और 48 के बाद दोगुनी दर पर कुल ₹16,800 बनते हैं।

टाइम कार्ड कैसे जोड़ें

1 जो सामने है उसके हिसाब से एक शिफ़्ट या पूरे हफ़्ते का विकल्प चुनें।
2 शिफ़्ट के लिए आने और जाने का समय 24 घंटे के रूप में लिखें और बिना वेतन का विराम मिनटों में घटाएँ।
3 हफ़्ते के लिए जोड़े हुए घंटे लिखें, और दोगुनी दर वाले घंटे अलग खाने में।
4 सीमा और गुणक अपनी शर्तों के हिसाब से रखें: कारखाना अधिनियम में ओवरटाइम सामान्य दर से दोगुना है, इसलिए यहाँ गुणक 2 रखा गया है।
5 वेतन के लिए दशमलव वाला आँकड़ा इस्तेमाल करें, घंटे-मिनट वाला नहीं।

वेतन दशमलव घंटों में बनता है, और हाथ से भरा टाइम कार्ड यहीं गड़बड़ करता है। आठ घंटे तीस मिनट 8.5 होते हैं, कभी 8.30 नहीं। पंद्रह मिनट 0.25, बीस मिनट 0.33, चालीस मिनट 0.67। साढ़े आठ घंटे के लिए 8.30 लिख देने पर रोज़ बारह मिनट का पैसा छूट जाता है, यानी हफ़्ते में करीब एक घंटा — इतना कम कि किसी की नज़र न पड़े और इतना ज़्यादा कि साल भर में मायने रखे।

कारखाना अधिनियम क्या कहता है

भारत में ढाँचा अमेरिका से अलग है, और गुणक तय करने से पहले यह साफ़ होना चाहिए। कारखाना अधिनियम 1948 के अनुसार काम नौ घंटे प्रतिदिन और अड़तालीस घंटे प्रति सप्ताह से ज़्यादा नहीं हो सकता (धारा 51 और 54)। इनमें से किसी भी सीमा से ऊपर का काम ओवरटाइम है और उस पर सामान्य दर से दोगुना वेतन देय है (धारा 59) — डेढ़ गुना नहीं, जो अमेरिकी नियम है और जिसे अक्सर यहाँ भी मान लिया जाता है। लगातार पाँच घंटे से ज़्यादा काम नहीं कराया जा सकता, बीच में कम से कम आधे घंटे का विराम ज़रूरी है (धारा 55), और विराम मिलाकर पूरा दिन साढ़े दस घंटे से लंबा नहीं हो सकता (धारा 56)। ओवरटाइम पर भी सीमा है: किसी तिमाही में पचास घंटे से ज़्यादा नहीं (धारा 64 और 65 के तहत राज्य के नियमों के अनुसार)।

दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों पर कारखाना अधिनियम नहीं, बल्कि अपने-अपने राज्य का दुकान एवं स्थापना अधिनियम लागू होता है, और उसकी सीमाएँ राज्य दर राज्य बदलती हैं — कहीं दैनिक सीमा नौ घंटे है, कहीं आठ। इसीलिए यहाँ सीमा और गुणक दोनों बदले जा सकते हैं; तय मानकर नहीं चलाए गए।

असली दर क्या बताती है

हफ़्ते वाले हिसाब में "सभी घंटों पर असली दर" की पंक्ति कोई भी अतिरिक्त शिफ़्ट लेने से पहले पढ़ने लायक है। अड़तालीस घंटे के ऊपर चार घंटे ओवरटाइम औसत दर को उतना नहीं बढ़ाते जितना दोगुने की बात से लगता है, क्योंकि दोगुनी दर सिर्फ़ उन्हीं अतिरिक्त घंटों पर लगती है, पूरे हफ़्ते पर नहीं। इसमें कर जोड़ लें, ख़ासकर जब अतिरिक्त आय किसी ऊपरी स्लैब में पहुँचा दे, तो एक अतिरिक्त घंटे का असली मोल और कम रह जाता है।

लोग इसे किस काम में लेते हैं

  • वेतन पर्ची को असल में किए गए घंटों से मिलाना
  • हफ़्ते का हाज़िरी पत्रक भरना
  • भारी हफ़्ते को सामान्य और ओवरटाइम घंटों में बाँटना
  • यह तय करना कि अतिरिक्त शिफ़्ट लेना फ़ायदे का है या नहीं
  • घंटे-मिनट को वेतन के लिए दशमलव में बदलना

सवाल

मिनटों को 60 से भाग दीजिए। तीस मिनट 0.5, बीस मिनट 0.33 और पैंतालीस मिनट 0.75 होते हैं।

कारखाना अधिनियम 1948, धारा 51–59 — काम के घंटे और ओवरटाइमश्रम एवं रोज़गार मंत्रालय, भारत सरकार
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